अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा
(एआईकेएमएस)
प्रेस वक्तव्य:
★ देशभर में प्याज की कीमत में गिरावट - लासलगांव में 1 रुपये प्रति किलो।
★ मोदी सरकार अदृश्य - भावांतर पर मौन - व्यापारियों को मदद।
★ गिरावट को रोकने के लिए खरीद मूल्य 15 रुपये प्रति किलोग्राम घोषित करें – एआईकेएमएस
★ दुनिया भर में प्याज की कीमतों में भारी वृद्धि - किसानों को अच्छी कीमत दिलाने में मदद करने में सरकार असफल - निर्यातकों के आगे नतमस्तक।
★नेफेड द्वारा 9 रुपये किलो का भुगतान] जो उत्पादन लागत से कम है।
सरकार के कठोर और किसान विरोधी रवैये के परिणामस्वरूप देश भर में प्याज के दाम में भारी गिरावट आ गयी है, भारत की सबसे बड़ी प्याज मंडी, लासलगाँव में कीमतें 1 रुपये प्रति किलो तक गिरे। किसान संकट में हैं क्योंकि सरकार उन्हें बचाने के लिए अपने कदम आगे बढ़ाने में पूरी तरह से विफल रही है।
एआईकेएमएस की केंद्रीय कार्यकारिणी ने मांग की है कि सरकार उत्पादन लागत से डेढ़ गुना दाम पर, कम से कम 15 रुपये प्रति किलो पर प्याज खरीदने की घोषणा करे। यह अपने आप में सुनिश्चित करेगा कि कीमतें बढ़ जाएंगी और किसान अपने संकट का फायदा उठाने वाले बेईमान व्यापारियों को बेचने के बजाय, इंतजार करेंगे। उर्वरक, ईंधन, बिजली और सिंचाई की कीमतों में वृद्धि के कारण उत्पादन लागत लगातार बढ़ रही है।
आज दुनिया भर में प्याज की भारी कमी हो गयी है और कई देशों में कीमतों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। भारत भी अपना निर्यात बढ़ाएगा। अनुकूल व्यापार स्थितियों के बावजूद सरकार किसानों को अच्छी कीमत दिलाने में मदद करने में विफल रही है। वह किसानों को औने-पौने दामों पर बेचने और व्यापारियों की मदद करने के लिए मजबूर करने का काम कर रहा है।
भारत सरकार ने भारतीय राष्ट्रीय किसान सहकारी विपणन संघ, नाफेद और भारतीय राष्ट्रीय उपभोक्ता सहकारी संघ, एनसीसीएफ को न्यूनतम खरीद मूल्य की घोषणा किए बिना ही और न ही भावांतर मूल्य स्थिरीकरण योजना से कोई फंड जारी किए बिना, प्याज की खरीद बढ़ाने के लिए कहा है। कई वर्षों से सरकार 500 करोड़ रुपये का भावांतर फण्ड बजट में घोषणा करती आई है, लेकिन धन अप्रयुक्त रहता है।
भारत में कुल 318 लाख टन प्याज का उत्पादन होने की उम्मीद है, जिसमें से 72 फीसदी से अधिक इस रबी फसल के दौरान बाजार में आएगा। इससे पहले, भले ही भारत के पास लगभग 2-5 लाख टन प्याज का सुरक्षित भंडार था, लेकिन उसने अगस्त 2022 में 12,000 टन प्याज का आयात किया।
डॉ. आशीष मित्तल- महासचिव
वी वेंकटरमैया- अध्यक्ष

आपका विश्लेषण सही है l
जवाब देंहटाएंजब मंडीमे उत्पाद कम होता, मांग ओर पूर्ती यह सब देखकर आयात की जाती, लेकीन यह सरकार जानबुजकर पिसले किसान आंदोलन का बदला ले रही है l
धिक्कार ऐसें निती की
प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद!..
हटाएंआप सही कह रहे हैं। शासकों को किसानों की नहीं, कम्पनियों के मुनाफ़े की चिंता रहती है!