सब्ज़ी की खेती: क्यों करें किसान?

         कैसे बरबाद हो रहा है किसान?..

 - आलू टमाटर के गिरे दाम, भारी घाटे मे किसान।

- आढ़तियों को ₹650/कुन्तल की राहत

- भाजपा ने की किसानों की पूर्ण अनदेखी

- सरकारी भावांतर योजना अमल हो या.मिले ₹60000 एकड़ की क्षतिपूर्ति - एआईकेएमएस

आज नवीन मंडी जसरा में क्षेत्रीय किसानो ने इकट्ठा होकर बाजार में आलू टमाटर के दाम गिरने के बावजूद आरएसएस - भाजपा सरकार द्वारा किसानों को राहत ना देने की कड़ी निन्दा की गयी। 

अखिल भारतीय किसान मजदूर के नेताओं ने कहा एक तरफ सरकार आलू व टमाटर के आढ़तियों एवं व्यापारियो को रु 650 का प्रति कुंतल सहयोग देने की घोषणा की है, परन्तु किसानों को भूल गयी जो असल में इसका बड़ा नुक़सान झेल रहे हैं।

प्रदेश में करीब तीन करोड़ परिवारों में से लगभग 15 लाख से ज्यादा किसान परिवार आलू की खेती करते हैं। आलू की खेती की लागत प्रति एकड़ 1,10,000 रूपये आती है, जबकि 100 कुंटल आलू पैदा होता है। सरकार ने घोषणा किया था कि स्वामीनाथन आयोग के आधार पर लागत का डेढ़ गुना रेट देगी। इस हिसाब से आलू का रेट ₹16 रूपये प्रति किलो मिलना चाहिए। इसी तरह टमाटर की लागत करीब ₹12 किलो आती है और इसका रेट रुपए 18 प्रति किलो सुनिश्चित करने की जरूरत है।

किसानों ने मांग की कि सरकार अपनी बहु प्रचारित भावांतर योजना को अमल करे, वरना ₹60000 / एकड़ के हिसाब से सभी किसानों को क्षतिपूर्ति दे।

मंडी सचिव श्री नवीन कुमार को मांग पत्र सौंपा। उन्होंने इसे शीघ्र ही शासन को भेजने का आश्वासन दिया।◆◆

प्रेस विज्ञप्ति 14/03/2023:

 हीरालाल  - उत्तर प्रदेश सचिव महासचिव

 राम कैलाश - प्रयागराज अध्यक्ष 

 राजकुमार पथिक - प्रयागराज महासचिव

      अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा, प्रयागराज

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